Suroor-e-Sarmadi

£139.99

Suroor-e-Sarmadi

Author: Nashad Kanpuri

Dinosaur mascot

Language: English

Published by: Gyan Publishing House

Published on: 30th June 2019

Format: LCP-protected ePub

Size: 230 pages

ISBN: 9788121254861


नाशाद साहब की शायरी में दर्द का एक ख़ास स्थान है

स्वयं उनके शब्दों में, ‘मेरे यहाँ गम का मर्तबा बहुत बुलंद है। वह एक ऐसा पाक़ जज़्बा है जो आदमी को इंसान बना दे, गम अंगेज या उम्मीद शिकन नहीं - वो दूसरों से मुहब्बत करना, उनके दुःख में शरीक होना, उनका हाथ बटाना सिखाता है’; मौत क्या है आप ही खुल जाएगा पहले समझो ज़िंदगी क्या राज़ है। जात पात और धर्म के भेद भाव को वह नहीं मानते, कुछ समझते ही नहीं। अहले-हरम वरना जो सज्दा है काबा साज़ है। सीधी सादी भाषा में अनुभूतियों को व्यक्त करना उनकी ख़ासियत है। आग देता है बागबाँ किसको हाय जालिम, यह आशियाना है उनकी शायरी में। जीवन के हर रंग को जगह मिली है।

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